चलो खुशियाँ समेट लें….

चलो ऐसी दुनिया में जहाँ खुशियाँ हो ढेर सारी और सुख ही सुख। क्या ऐसी दुनिया केवल मन की कोरी कल्पना है या हकीकत। वास्तव में सब कुछ पा लेना, दुनिया में सभी के लिए संभव नहीं है किन्तु हमारी इच्छाएं, चाहत, हमें उसे खोजने में सहायता करती हैं।
किसी को दौलत में सुख मिलता है, किसी को नए नए स्थानों में भ्रमण करने में तो कोई अपने किसी साथी के साथ ही बैठे बैठे सुख पा लेता है।
किंतु जब कोई प्रेम में होता है, जब कोई पवित्र ह्रदय से किसी से मिलता है, जब कोई अपनी आत्मा को एकदम शांत छोड़ देता है, तब अद्भुत सुख की दुनिया में पहुँच जाता है।
वैसे आँखों से ख़ूबसूरती जो सुख देती है, उससे सब परिचित हैं। और इसे किसी सुन्दर से चेहरे की मुस्कान देखकर भी पाया जा सकता है। तो फिर कभी सुख की बहुत अधिक कीमत चुकानी पड़ती है जबकि वही सुख हमे बहुत कम कीमत पर भी हासिल हो जाता है। जब आप अपने मन को निश्छल कर छोटी छोटी ख़ुशी पाने लगेंगे तो एक दिन उन्हीं खुशियों का भंडार किसी बेहद बड़ी मिली ख़ुशी से अधिक मात्रा में होगा। कोशिश करिये कि मुफ्त में भी सुख हासिल कर सकें और यह अपने दोस्तों से मिलना, बात करना, मौज मस्ती करना या मन को आकर्षित करने वाली तस्वीर भी हो सकती है। कोशिश करिये हर छोटे छोटे पलों को पूरा जीने की, अपने अंदर समाने की और एक बेहद सुखी जीवन जीकर सबके लिए प्रेरणा बनने की।
-अज़ीम

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