Poetry

मोहब्बत है मुझे ऐसी

तुम्हें कुछ दूर जाना है, मुझे कुछ पास आना है,
मुझे इतना बताना है, मेरा रिश्ता पुराना है।
मोहब्बत है मुझे ऐसी, हर एक शय में तुम्हें देखूँ,
फ़लक का चाँद हो तुम तो, तुम्हें सबको मनाना है।।

मुनासिब ये नहीं है कि, बिना साहिल के छोड़ो तुम,
रखो दिल में मेरे पत्थर, रिश्ता जन्मों का तोड़ो तुम।
ये भी मुमकिन है कि दोनों, निभाते ही चले जाएं,
दरिया गहरा है रहने दो, हमें अब पुल बनाना है।।

तनहा मैं हूँ यहाँ पर और, वहाँ पे भी तनहा तुम हो,
किस्से जो हमने लिखे हैं उसके किरदार में तुम हो।
रखके तकिए पर सिर मेरा, भटकता हूँ मैं ख्वाबों में,
कहीं भी रोज़ मैं भटकूँ, तुम्हारा दिल ठिकाना है।।

-अज़ीम

Author

azeem.shah61@gmail.com

Comments

लिपिका
March 31, 2019 at 2:01 pm

Superb dear.



Chandraprakash
March 31, 2019 at 9:35 pm

Very nice poetry



Ashvan
March 31, 2019 at 11:44 pm

You are always LAJAVAB…..



मुकेश बिसेन
April 1, 2019 at 8:18 am

गहरा है …..दरिया ….पूल बनाना ही सही है



लोकेश कुमार राजपूत
April 1, 2019 at 10:45 am

हमारा रिश्ता पुराना है।।।। बहुत खूब



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