मोहब्बत है जो मैं कह दूँ

मोहब्बत है जो मैं कह दूं
तो कैसा करोगे तुम
मुझे बाहों में भर लोगे
या बस आहें भरोगे तुम
इज़हारे-इश्क़ हो गर आसां
तो फिर कैसी मोहब्बत है
हुई जो दुनिया ये दुश्मन
तो भी क्या चाहा करोगे तुम
यहाँ सीने में मेरा दिल
चुपके से धड़कता है
तुम्हें ही याद करता है
हमें क्या याद करोगे तुम
-अज़ीम

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