ऐसे तुम आ गए जो मेरे सामने

ऐसे तुम आ गए जो मेरे सामने

गुलशन फीके पड़े, गुल भी हैरान है
ऐसे तुम आ गए, जो मेरे सामने
नूर चमका यहाँ, वो जग सुनसान है
ऐसे तुम आ गए जो मेरे सामने

आग दिल में लगी, एक तमाशा हुआ
जिस्म तेरा परियों सा, तराशा हुआ
बेक़रारी बढ़ी, धड़कन रुक ही गई
ऐसे तुम आ गए जो मेरे सामने

फ़र्क़ इतना सा था, कि तुम मेहमान थे
मेरे दिल की लगी से तुम, अंजान थे
तार दिल के मेरे, आज हिल ही गए
ऐसे तुम आ गए जो मेरे सामने

रफ़्ता-रफ़्ता दीवाने से, हम हो गए
नज़रे तुमसे मिली, होश हम खो गए
तीर दिल में लगा, सीना छलनी हुआ
ऐसे तुम आ गए जो मेरे सामने
©अज़ीम

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