Poetry

ऐसी है मोहब्बत

यूँ लगता है जैसे कि वो चाँद खफा है
दूर है तो क्या हुआ उसे मुझसे वफ़ा है
दिल तोड़ रूठ जाना उसे बहुत भाता है
दुनिया को बहकाना उसे बहुत आता है
पास हैं इतने कि साँसे बसती हैं हमारी
ये जन्मों का रिश्ता दिल की है खुमारी
दिल को धड़कने से रोक सकते हो क्या
सांसों से रूह जुदा कर सकते हो क्या
ऐसी ही मोहब्बत और साथ है हमारा
आसमाँ के चाँद का मैं हूँ वो सितारा
-अज़ीम

Author

azeem.shah61@gmail.com

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