ऐसी है मोहब्बत

यूँ लगता है जैसे कि वो चाँद खफा है
दूर है तो क्या हुआ उसे मुझसे वफ़ा है
दिल तोड़ रूठ जाना उसे बहुत भाता है
दुनिया को बहकाना उसे बहुत आता है
पास हैं इतने कि साँसे बसती हैं हमारी
ये जन्मों का रिश्ता दिल की है खुमारी
दिल को धड़कने से रोक सकते हो क्या
सांसों से रूह जुदा कर सकते हो क्या
ऐसी ही मोहब्बत और साथ है हमारा
आसमाँ के चाँद का मैं हूँ वो सितारा
-अज़ीम

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